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इंटरनेट
| Wednesday, June 30, 2010
जिन लोगों को टच स्क्रीन फोन के वच्यरुल की-बोर्ड पर टाइपिंग करने में दिक्कत होती है उनके लिए अच्छी खबर है। अमेरिका के विशेषज्ञों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो टच स्क्रीन पर उंगली से लिखे शब्द को पहचान लेगा।
1990 के दशक में अधिकांश मोबाइल फोनों पर अंग्रेजी का शब्द ‘हेलो’ लिखने के लिए बटनों को 13 बार दबाना पड़ता था। यानि कि 44-33-555-555-666। लेकिन सिएटल के विशेषज्ञ क्लिफ कुशलेर और उनके एक साथी ने इस समस्या को दूर करने के लिए टी9 नाम का साफ्टवेयर बनाया जो केवल तीन बार बटन दबाने पर हेलो शब्द को अपने आप पहचान लेता है।
कुशलेर का मानना है कि टच स्क्रीन पर टाइपिंग की समस्या का भी उनके पास समाधान है। उन्होंने अपने एक साथी वैज्ञानिक रैंडी मार्सडेन के साथ मिलकर एक नया सॉफ्टवेयर विकसित किया है जिसका नाम स्वाइप है। जब आप टचस्क्रीन के की-बोर्ड पर अपनी उंगली से कोई शब्द लिखते हैं तो स्वाइप इस शब्द को पहचानने के लिए यह देखता है कि आपकी उंगली कहां रुकी और किस तरफ मुड़ी।
जरूरी नहीं है कि आपकी उंगली का मूवमेंट एकदम सटीक हो, क्योंकि यह साफ्टवेयर इस बात का अनुमान लगा लेता है कि उपयोगकर्ता किस शब्द को लिखने जा रहा है। कैपिटल लेटर या डबल लेटर लिखने के लिए आपको उंगली को थोड़ा रोककर संकेत देना होगा। वहीं स्पेसिंग या पंक्चुएशन को यह सॉफ्टवेयर खुद लगा लेगा। अमेरिका में स्वाइप का इस्तेमाल सात स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है। कुशलेर का कहना है कि साल के अंत तक विश्वभर में 50 से अधिक मॉडलों में यह सॉफ्टवेयर आ जाएगा।
यदि आप ओरिएंटल बैंक के ग्राहक हैं, तो सतर्क हो जाएं। किसी व्यक्ति ने बैंक की एक से अधिक नकली वेबसाइट बना ली हैं। इन वेबसाइट से ग्राहकों को ई-मेल कर खाते से संबंधित जानकारियां पूछीं जा रही हैं।
इसमें से एक नकली साइट की भनक लगने पर बैंक मुख्यालय ने अपने ऑनलाइन ग्राहकों को इस तरह के ई-मेल का जवाब न देने को कहा है। दैनिक भास्कर द्वारा मामले की जानकारी देने के बाद बैंक की भोपाल शाखा के अधिकारी भी इसकी जानकारी मप्र पुलिस के सायबर सेल को देने जा रहे हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की भोपाल शाखा के पूर्व चेयरमेन राजेश जैन के पास ऐसा ही ई-मेल पहुंचा। इसमें श्री जैन से उनके ऑनलाइन खाते की जानकारियों को कंफर्म करने को कहा गया। उन्होंने भास्कर संवाददाता को इसकी जानकारी दी। खास बात यह है कि श्री जैन इस बैंक के ग्राहक नहीं हैं। कुछ साल पहले तक वे बैंक के ऑडिटर थे। आईजी साइबर सेल राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
ताते हैं कि उनके नाम से किसी व्यक्ति ने बैंक में फर्जी खाता भी खुलवा लिया हो तो कोई आश्चर्य नहीं है।
एक से अधिक नकली साइट
नकली वेबसाइट बनाने की जानकारी एक पखवाड़े पहले बैंक प्रबंधन को लगी। उसने अपने ऑनलाइन उपभोक्ताओं को इस तरह के ई-मेल का जवाब न देने की सलाह दी है। बैंक के एआरएम (आईटी सेल) मोहित गुप्ता बताते हैं कि ऑनलाइन उपभोक्ताओं के लिए बैंक की अधिकृत वेबसाइट obconline.co.in है जबकि ई-मेल obconlines.co.in से आ रहे हैं। दूसरी तरफ श्री जैन को जो मेल आया है वह bconlines.co.in से आया है और बैंक की वेबसाइट obcindia.co.in है।
obc.co.in वेबसर्विस उपलब्ध कराने के नाम रजिस्टर्ड कराई गई है। श्री गुप्ता ने बताया कि वे इस मामले की शिकायत मप्र पुलिस की साइबर सेल को करने जा रहे हैं।
कुछ धोखेबाज लोगों ने रिजर्व बैंक के समान दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बना ली है। इस साइट से वे न केवल लोगों को लॉटरी जीतने आदि के फर्जी ई- मेल कर रहे हैं, बल्कि उन पर वास्तविक लगने वाले परिपत्र तक जारी कर रहे हैं।
रिजर्व बैंक के रीजनल डायरेक्टर राजेश वर्मा ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में आम लोगों से अपील की कि वे इस तरह की वेबसाइट, ई-मेल और एसएमएस के जाल में न फंसे। रिजर्व बैंक इस तरह की कोई योजना नहीं चलाता है।
एक सवाल के जवाब में श्री वर्मा ने बताया कि बैंक को मप्र-छग से हर महीने चार से पांच शिकायत मिल रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है, जिनके साथ धोखाधड़ी हो गई हो लेकिन वे शिकायत करने नहीं आए हों।
एटीएम से नकली नोट की शिकायत पर कार्रवाई होगी
एक सवाल के जवाब में श्री वर्मा ने माना कि उन्हें मीडिया के माध्यम से एटीएम से नकली नोट की शिकायतें मिली हैं। बैंकों को इन शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने को कहा गया है। बैंकों के लिए यह भी जरूरी किया गया है कि वे नकली नोट पकड़ने वाली मशीनें लगाएं।
बैंकों द्वारा केवाईसी नॉर्म्स का पालन न करने और फर्जी खाते खोले जाने पर श्री वर्मा ने कहा कि बैंकों को निर्देश जारी किए गए हैं। हाल के आयकर छापों में सामने आई बैंकों से संबंधित गड़बड़ियों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जांच चल रही है